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पाठ्यक्रम निर्माण में ब्लूम के वर्गीकरण का महत्त्व IMPORTANCE OF BLOOM'S TAXONOMY IN CURRICULUM CONSTRUCTION

पाठ्यक्रम निर्माण में ब्लूम के वर्गीकरण का महत्त्व IMPORTANCE OF BLOOM'S TAXONOMY IN CURRICULUM CONSTRUCTION)


यद्यपि पाठ्यक्रम के क्षेत्र से सम्बन्धित सभी व्यक्ति ब्लूम एवं उसके सहयोगियों द्वारा प्रस्तावित शैक्षिक उद्देश्यों के सूक्ष्म वर्गीकरण से पूर्णतः सहमत नहीं है, किन्तु वे सभी लोग निश्चित एवं स्पष्ट उद्देश्यों की अनिवार्यता को स्वीकार करते हैं। इसी दृष्टि से इस वर्गीकरण की उपयोगिता असंदिग्ध है। पाठ्यक्रम नियोजन की दृष्टि से इस वर्गीकरण के प्रमुख लाभ इस प्रकार है:-

1. यह वर्गीकरण 'सरल से जटिल की ओर' के सिद्धान्त पर आधारित है। इसलिए यह प्रणाली उस स्तर का समुचित ज्ञान प्राप्त करने में बहुत सहायक है जिस पर कोई सीखने वाला कार्य कर रहा होता है।

2. सीखने वाले के स्तर का सही ज्ञान होने पर मूल्यांकन की प्रविधियों, उपकरणों आदि को निश्चित करने तथा उन्हें तैयार करने में भी सुविधा होती है। इसके साथ ही उनका वर्गीकरण भी सरलता एवं स्पष्टता से किया जा सकता है। इस प्रकार इससे मूल्यांकन को उद्देश्य केन्द्रित बनाने में सहायता होती है।

3. इस वर्गीकरण की सहायता से मूल्यांकन विधियों की वैधता की जाँच भी सरलता से की जा सकती है।

4. तर्क आधारित होने के कारण, इस वर्गीकरण से अध्ययन सामग्री तथा शिक्षण अधिगम स्थितियों के क्रमिक नियोजन में बहुत सहायता मिलती है। 

5. इस वर्गीकरण से उचित परीक्षा स्थितियों के चयन में भी सुविधा होती है।

6. इस वर्गीकरण में शिक्षण एवं मूल्यांकन दोनों के समस्त पक्षों पर समुचित ध्यान देने के कारण विद्यार्थियों के सर्वांगीण एवं सन्तुलित विकास के सम्बन्ध में निश्चित हुआ जा सकता है। 

7. इस वर्गीकरण से पाठ्य पुस्तकों तथा अन्य पाठ्य-सामग्री के निर्माण, विश्लेषण, मूल्यांकन, संशोधन एवं संवर्द्धन आदि में बहुत अधिक सुविधा रहती है।

8. यह वर्गीकरण स्पष्ट परिभाषित तर्क पर आधारित है। अतः यह पाठ्यक्रम निर्माण के विभिन्न संभागियों (शिक्षा-मनोवैज्ञानिक, विषय विशेषज्ञ, शोधकर्ता, मूल्यांकनकर्त्ता तथा समाज-वैज्ञानिक आदि) के बीच आवश्यक आदान-प्रदान के कार्य को दृढ़ आधार प्रदान करता है। 

9. पाठ्यक्रम के क्षेत्र में अनुसन्धान के लिए भी यह वर्गीकरण उपादेय सिद्ध हो रहा है तथा नवीन शोध-क्षेत्र भी प्रस्तुत कर रहा है।

10. ज्ञानात्मक भावात्मक एवं क्रियात्मक तीनों पक्षों से सम्बन्धित होने से यह वर्गीकरण औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रमों के निर्माण में बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण है।

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